प्रिय मित्रों
यह कोर्स लाभदायक है BA/MA/UGC NET /आईएएस , पीसीएस के लिए ,बहुत आसान शब्दों मे समझाया गया है जो नए विद्यार्थियों को समझना आसान होगा,
समाजशास्त्र की अवधारणा विभिन्न सिद्धांतों , प्रकार्यों , प्रभावों , कारकों तथा विभिन्न प्रकिर्याओं से जिज्ञासु पाठकों को भली भाँति परिचित कराना है।इन सिद्धांतों तथा प्रक्रियाओं को स्पष्टतः समझाने के उद्देश्य से आवश्यकतानुसार समुचित उदाहरण भी दिये गये हैं।भाषा और शैली इस प्रकार की अपनायी गयी है कि विषय का प्रारम्भिक ज्ञान अवधारणा से विद्यार्थियों तक पहुँच सके।मुख्य ध्यान इसी बात का रखा गया है कि विद्यार्थी विषय वस्तु को ठीक प्रकार से समझ सकें।छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विषय को सरल भाषा में गया है।
अन्त में परीक्षापयोगी प्रश्न दिये गये हैं।
प्रस्तुत कोर्स केवल विश्वविद्यालय स्तर के पाठकों के लिए ही नहीं बल्कि संघ लोक सेवा आयोग ( UPSC ) तथा विभिन्न राज्यों की लोक सेवा आयोग ( PCS ) के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होगी , ऐसा मेरा विश्वास है।यह प्रयास कहाँ तक सफल है इसका फैसला सुधी पाठकों के हाथ है।इसे और बेहतर बनाने के लिए आपके सुझावों का स्वागत है। इस कोर्स मे निम्न बिन्दुओं को अछे से समझाया गया है....
1.समाजशास्त्र
-समाजशास्त्र का अर्थ परिभाषा
-समाजशास्त्र का क्षेत्र
-समाजशास्त्र की विषय – वस्तु
-समाजशास्त्र का अन्य सामाजिक विज्ञानों से सम्बन्ध
2. समाज
-समाज की अवधारणा एवं विशेषताएँ
-समाज के प्रमुख आधार या तत्त्व
-समाज की विशेषताएं
-समाज के प्रकार एवं उदाहरण
3.समुदाय
-समुदाय की विशेषताएँ
-सीमावर्ती समुदायों के कुछ उदाहरण
4.समिति
-समिति का अर्थ एवं परिभाषा
5.संस्था
-संस्था का अर्थ और परिभाषा
-संस्था की विशेषताएँ
6.सामाजिक समूह
-सामाजिक समूह की विशेषताएँ
-प्राथमिक समूह
-द्वितीयक समूह
-संदर्भ समूह की अवधारणा
7.परिवार
-परिवार की विशेषताएँ
-परिवार के प्रकार
8.प्रस्थिति और भूमिका
- प्रस्थिति और भूमिका के आवश्यक तत्व
9.सामाजिक मानदण्ड
-मूल्यों की विशेषताएँ
10.संस्कृति
-संस्कृति के प्रकार
-सभ्यता
-सभ्यता और संस्कृति में अन्तर
11.सामाजिक प्रक्रियाएँ
-सहयोग
-सहयोग के महत्त्व
-समायोजन
-प्रतिस्पर्धा
-प्रतिस्पर्धा का महत्त्व
-संघर्ष
-संघर्ष का महत्त्व संघर्ष
समाजीकरण
- समाजीकरण की प्रक्रिया के स्तर
सामाजिक संरचना
-सामाजिक संरचना के तत्व
सामाजिक व्यवस्था
-सामाजिक व्यवस्था की विशेषताएँ
12.सामाजिक परिवर्तन :
अवधारण ( Concept ) * कारक ( Factors )
13. सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांत :
* रेखीय व उद्विकासीय सिद्धांत कॉस्ट , स्पेन्सर , दुर्थीम , मॉर्गन के विचार
* चक्रीय सिद्धांत , सोरोकिन , स्पेंगलर के विचार
संघर्षवादी सिद्धांत , मार्क्स , सिम्मेल , कोजर , डहरेन्डॉर्फ के विचार
* प्रकार्यवादी सिद्धांत , ब्राउन , मैलेनोस्की पारसंस व मर्टन के विचार
* चुनौती एवं प्रत्युत्तर के सिद्धांत , टॉयनबी के विचार
14.सामाजिक परिवर्तन के स्वरूप
* प्रगति ,
विकास तथा
आन्दोलन
15. सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रियाएँ
*संस्कृतिकरण व पश्चिमीकरण
* नगरीकरण व औद्योगीकरण
* आधुनिकीकरण व लौकिकीकरण
16.सामाजिक आन्दोलन
अवधारणा ( Concept )
* प्रकार व महत्त्व ( Types and Importance )
17
सामाजिक स्तरीकरण
प्रकार्य
महत्व